शांति जिनेश्वर साहिबो, शांति करण सुखकार;विश्वसेन कुल नंदन, अचिरा माँ मल्हार।हस्तिनापुरनो धणी, गजपुरनो अवतार;कामित पूरण सुरतरु, वंदूँ वारंवार।
प्रभु शांतिनाथ का वर्ण कंचन (सुनहरा) है और उनका लांछन मृग (हिरण) है。
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: भगवान की भक्तिमयी पंक्तियाँ गाएं। palitana 5 chaityavandan in hindi full
जैन धर्म के सबसे पवित्र तीर्थों में से एक (जिसे पालीताना के नाम से भी जाना जाता है) की यात्रा में पाँच चैत्यवंदन करना अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह यात्रा तीर्थ के प्रति गहरी आस्था और समर्पण का प्रतीक है। पालीताना, जिसे अक्सर "मंदिरों का शहर" कहा जाता है, श्वेतांबर जैन परंपरा के सबसे पवित्र स्थलों में से एक है। पालीताना मंदिरों का परिसर शत्रुंजय पहाड़ियों पर स्थित है और यहाँ 1300 से अधिक संगमरमर से बने मंदिर हैं।
संबंधित भगवान का मधुर स्तवन गाएं और अंत में स्तुति बोलें।
एह गिरि नी महिमा अनंत, कुण करे वखाण,चैत्री पूनम ने दीने, तेह अधिको जाण। (२) शांति जिनेश्वर साहिबो
पलिताना (शत्रुंजय महातीर्थ)
हाँ, चैत्यवंदन करने पर कोई लिंग-भेद नहीं है। विधि में महिलाओं के लिए पुरुषों से अलग कुछ सूत्रों का उल्लेख है, लेकिन अनुष्ठान करना दोनों के लिए समान रूप से फलदायी और महत्वपूर्ण है।
यह वंदन भगवान आदिनाथ के प्रथम गणधर पुंडरीक स्वामी के मंदिर में किया जाता है। शांति करण सुखकार
भारत के गुजरात राज्य में स्थित पालिताना (शत्रुंजय तीर्थ) जैन धर्म का सबसे पवित्र तीर्थ स्थल है। मान्यता है कि यहाँ 23वें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ और प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव (आदिनाथ) सहित अनेक तीर्थंकरों ने दीक्षा, क्षमा और मोक्ष प्राप्त किया। पालिताना की यात्रा तब सार्थक होती है, जब यात्री (श्रावक) प्रतिदिन (5 Chaityavandan) का पाठ करते हुए मंदिरों में वंदना करें। यह लेख संपूर्ण हिंदी भाषा में, शुद्ध मंत्रों एवं भावार्थ सहित प्रस्तुत है।
यह वंदन पर्वत की तलहटी में ' जय तळेटी
"श्री शत्रुंजय सिद्धक्षेत्र, दीठे दुर्गति वारे; भाव भरीने जे चढे, तेने भवपार उतारे।"
"आदिजिनेश्वर रायना, छे पगलां मनोहार; भावसहित भक्ति करे, पहोंचाडे भवपार।"